Saturday, 21 January 2017

Shifts in Priority


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At one time, limelight was secondary
less important compared to
Safeguarding one’s reputation

Today, anything it is
for that moment of glory …
So being “fastest man on earth”
on D day is paramount
never mind if you are declared
"The fastest junkie on earth”
the next day !

or getting that award
before the elite, in an  elegant hall
as the best entrepreneur
or CEO today is paramount
never mind if skeletons
come tumbling out
of the cupboard tomorrow!







Saturday, 14 January 2017

अफ़वाह

पहले भी गप मारना बहुतों को पसंद था
"फलाना स्टार मर गया
कोई गिर गया , कोई डर गया
कोई भागा किसी और की बीवी के साथ!"

अब तो सोशल मीडिया भी आयी
तो  मज़ा ही मज़ा है!
पहले न्यूज़ फैलाने की चक्कर में
सही गलत की जाँच केलिए
किसके पास समय है?

सच्ची  बात तो यह है
कि हम एक ही बाप के बच्चे है
भले अपने ही भाई की निंदा करने में
मज़ाक उठाने में,ऐसे क्या मज़ा है ?

दुनिया में मानव कहीं भी रहे
कोई भी भाषा वेशभूषा के हो
भिन्न भिन्न धर्म का हो
सच्ची बात तो यह है
कि हम सब एक ही बाप के बच्चे है !

तो मत करो प्रसिद्धि
व्यर्थ, बुरी बातों की
न सुनो या सुनाओ
इस रीति का ताज़ा खबर
और ख़बरदार रहो अफ़वाहों  से...

NB: यह कविता बीके ( ब्रह्मकुमारीs)  की  पढाई से प्रेरित है।



Wednesday, 11 January 2017

All of us have Pets!

I came across this concept
this  concept of  the 'Pet'
read 'personal emotional trainer',
a concept ,very interesting, very enlightening...

Challenging people and situations it says
be viewed not as setbacks or headaches
but as personal emotional trainers!

So a harassing boss, difficult subordinate
an emotionally blackmailing spouse
other difficult circumstances...
are all doing you a favour
training you to be emotionally stronger
steeling you to take on the big challenges
and the harsh realities of life....


Saturday, 7 January 2017

वास्तव में ..

हम  सोचते है
कि पूरी दुनिया रूचि रखते है
कि हम क्या खाये थे सुबह नाश्ता में
और कब, क्या भोजन लिया,फलना रेस्टोरेन्ट से
इसलिए एफबी अपडेट.पल पल  करना  है..

हम  सोचते है
कि सारी दुनिया की नज़र
है हमेशा हम पर,
दिलचस्पी  रखते है कि
हमें प्रमोशन मिला है कि नहीं
 लड़का इम्तेहान में फ़ैल हुआ कि पास
क्या दफ्तर में बेइज़्ज़ती हुआ हैं ?

कभी कभी  शर्म से हम
छिपते रहते घर में
दूर रहते, शादियों से
व अन्य सामाजिक सम्मेलनों से ...

वास्तव में ऐसा नहीं, जैसे  हम सोचते है
दूसरों पर चिन्ता करने
किसके पास समय है ?
भूल चुके होते लोग
दो तीन दिन के चर्चे से
हर एक का है अपनी समस्या
जीवन तो है जीना है ...

Tuesday, 3 January 2017

His Grandpa- My Grandpa

His grandpa is ever smiling
Cutting jokes, playful
Seemingly, with not a care in the world

My grandpa on the other hand
 is always grumpy, harsh
critical and recalling bitter memories

It’s said old age is like wine
the good ones getting better
bad ones turning more sour
if only my grandpa could be
like his grandpa, more of sunshine
less of the snow- more of soul consciousness
and less of body consciousness!



Sunday, 1 January 2017

New Year Song


IndiBlogger Badge

Happy new year, happy new year..
happy heart, happy soul
happy new year!

May the new year bring...
the best of everything
love, peace,prosperity,happiness...
for you, and your loved ones.. (Happy new year..)

So what will be new this year...?
will you be kinder...?
will you be more caring...?
will you be more accepting?
more forgiving? and more loving? ( Happy new year..)

Happy new year... this new, new year
new beginnings, new hopes
new passions, new goals...
may you get them all!
May you touch the sky!
for you deserve it and more....
my dear, dear friend! ( Happy new year..)

Friday, 30 December 2016

गुस्सा

ऐसा नहीं  कि लोगों को पता नहीं
कि सिगार्रेट पीना हानिकर है
फिर भी छोड़ नहीं पाते, आदत से
संस्कार जो  बन चुका   है!

गुस्से की कहानी भी कुछ वैसे ही है
सब  जानते है कि गुस्सा से
हानि ज़्यादा, फायदा कम
फिर भी छोड़ने की मुश्किल में, तड़पते रहते है

गुस्सा की शुरू है चिड़चिड़ाहट से
जब कोई, अपनी बात नहीं मानती
जब सब चीज़ अपनी इचानुसार नहीं होती
तो समझते है कि गुस्सा करना  स्वाभाविक है!

बहुतों का यह है, विश्वास
कि काम कराना है,तो चाहिए गुस्सा
कोई  बदलाव होगा तो  सिर्फ गुस्सा से
आखिर बदलाव लाना है विश्वास में हमारा
कि "नकारात्मक ऊर्जा से होगी सकारात्मक हल!"

अल्प काल. कुछ समय केलिए, गुस्सा
काम करने लगता है
पर लंबी काल में वह
स्थापित  होता निष्प्रभाव!

हमेशा  गुस्सा करने वालों को
अवज्ञा  करने लगते है, या स्वसुरक्षा
बचाव का लोग, तरीखे ढूंढ लेते है
क्रोध का अंतिम  परिणाम
है सिर्फ दरार,नाराज़गी
गलत फहमी और विरोध!  

जहाँ प्रेम और आदर हो सब का
काम से ज़्यादा प्रधानता, मनुष्यों का
वहाँ होता है काम अनायास
सब खुद करते है, प्यार से काम
निरिक्षण का सवाल ही नहीं उठता!

NB: यह कविता बीके ( ब्रह्मकुमारीs)  की  पढाई से प्रेरित है।